सफ़र

जाने-पहचाने और शांत रास्तों पर जब मैं चला,

पैरों तले मिट्टी की नर्मी को महसूस किया।

सामने वही बूढ़ा बरगद खड़ा था,

टूटी टहनियों की आँखों में एक पहचान थी।

पल भर को लगा जैसे मैं खुद से मिल गया।

ज़िंदगी अब समझदार हो चली है,

पर तलाश वही पुरानी खुशियों की है।

तो चलो, उसे फिर उसी मासूम नज़र से देखें,

जिससे बचपन ने हर रंग को महसूस किया था।

भाग-दौड़ में उलझी ज़िंदगी,

चलो कुछ पल चुरा लें,

फिर से जिएं वो लम्हे,

जो कभी हमारी धड़कनों में बसते थे।

अब, जब ज़िंदगी थककर सुस्ताने लगी है,

तो आओ लौट चलें वहीं—

जहाँ पहली किरण ने सपनों को छुआ था,

जहाँ उम्मीदों ने पहली बार करवट ली थी,

जहाँ से यह सफ़र शुरू हुआ था।।

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About Me

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I am Ajay Bhadoo. IAS Officer, serving as Joint Secretary to the President of India.

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